संत कबीर के दोहे-कामना सहित भक्ति में निराशा भी हाथ लगती है
मान बड़ाई देखि कर, भक्ति करै संसार।जब देखैं कछु हीनता, अवगुन धरै गंवार।संत कबीरदास जी कहते हैं कि दूसरों की देखादेखी कुछ लोग सम्मान पाने के लिये परमात्मा की भक्ति करने लगते हैं पर जब वह नहीं मिलता वह मूर्खों की तरह इस संसार में ही दोष निकालने लगते हैं।...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[22 Feb 2010 22:44 PM]



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