कौटिल्य का अर्थशास्त्र-अपना लक्ष्य कभी बीच में न छोड़ें

शब्दयोग सारथी-पत्रिका  रत्नैर्महाहैंस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरेभीमविषेण भीतिम्।सुधा विना न प्रययुर्विरामं न निश्चिततार्थाद्विरमन्ति धीराः।।हिन्दी में भावार्थ-समुद्र मंथन करने से देवता लोग अनमोल रत्न पाकर भी प्रसन्न नहीं हुए। भयंकर विष भी निकला पर उनको उससे भय नहीं हुआ और न... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[01 Mar 2010 22:48 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix