तुम कितनी सुंदर हो
-डॉ. अशोक प्रियरंजनजब भी होता हूं उदासआसपास फैली होती हैंजिंदगी की अनगिनत परेशानियांतब जेहन में चमकती हैतुम्हारी मुस्कराहटगालों पर रोशन दीयेदिल में उतर जाने वाली आंखेंमौन में भी गूंज उठता हैतुम्हारी आवाज का जादूसांसों में महकने लगता हैतुम्हारा अहसासगमक...
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dr. ashok priyaranjan
कविता
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[13 Feb 2010 14:33 PM]



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