हा हा हा

शुऐब इसलिए कि बहुत दिनों बाद हमने अपना चिट्ठा देखा तो मुंह से यूंहि हा हा हा निकल आया। अगर किसी को पसंद ना आए तो ही ही ही करलें इजाज़त है। कई बार अपना चिट्ठा देखा मगर जी भरके आज ही देखा। पुरानी क़िस्तों पर नज़र डाले तो ख़ुदपे हंसी आगई, बकवास छापने मे कोई [...]... [पूरी पोस्ट]
writer शुऐब
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[10 Feb 2010 04:15 AM]

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