मुँह मोड़े फिरते हैं

safar ke sajde mein कल गढ़-गँगा के उसी पुल और सड़क से गुजरी , जहाँ ठीक बीस साल पहले १७ फरवरी के ही दिन मेरी दीदी ने एक सड़क हादसे में अपने प्राण गँवा दिए थे | पिछले साल चाची जी के स्वर्ग-वास के बाद तेरहवीं से एक दिन पहले जब सब लोग बैठे थे , चाची जी की बहन ने मेरी दीदी को याद... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[18 Feb 2010 01:43 AM]

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