वो इतनी दूर

safar ke sajde mein रँग आसमान का नीला क्योंविरह पतझड़ सा पीला क्योंयादों का तना गठीला क्योंनश्तर सा समय नुकीला क्योंकोई पूछ के आए तो उससेवो इतनी दूर रँगीला क्योंसपनों का पुलिन्दा चटकीला क्योंभरमों का रँग भड़कीला क्योंदिल में जो छुप कर बैठा हैपूछो पूछो , वो सजीला क्योंआशा की... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[25 Feb 2010 01:56 AM]

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