शिमोगा या यो कहें कि घुटन सिर्फ तस्लीमा के हिस्से में ही क्यों आती है?
तस्लीमा नसरीन ने बयान दिया कि कर्नाटक के अखबार में छपा लेख तो बहुत पुराना है, और छापा भी उनसे इजाज़त लिये बगैर है. तस्लीमा होकर जीना हिम्मत का काम है. तस्लीमा ने यह नहीं कहा कि लेख मैंने नहीं लिखा. Taslima, we apologize for those who didn’t understand. वो...
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[03 Mar 2010 02:35 AM]



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