अरसे बाद, खिताबे-दोस्ती...

अमाँ यार..... दोस्ती का तज़किरा अय्यार से न होगा, तेरा बयां रिवायती मेयार से न होगा,बहुत चापलूस है ये लखनवी शायर,तेरी अज़मतों का जि़क्र खा़कसार से न होगा । ये जादु-ए-सुख़न तेरे ऊपर न चलेगा,बाकियों पे जो चला तुझ पर न चलेगा,मै ज़र्रा-ए-ज़मीन हूं तू शम्स-ए-आसमां,कितना भी... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु बाजपेयी
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[24 Feb 2010 02:58 AM]

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