अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आनासिर्फ अहसान जताने के लिए मत आनामैंने पलकों पे तमन्नाएँ सजा रखी हैंदिल में उम्मीद की सौ शम्मे जला रखी हैंये हँसीं शम्मे बुझाने के लिए मत आनाअब अगर आओ तो जाने के लिए मत आनाप्यार की आग में जंजीरें पिघल सकती हैंचाहने वालों...
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हिमांशु बाजपेयी
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[26 Feb 2010 02:00 AM]



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