उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलती [ग़ज़ल] - डॉ. कुमार विश्वास
आज जाने माने कवि और मंच-संचालक डॉ. कुमार विश्वास का जन्म-दिन है। साहित्य शिल्पी परिवार उन्हें इस अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं देता है। इस मौके पर आज प्रस्तुत है उनकी एक खूबसूरत ग़ज़ल:उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलतीहमको ही खासकर नही मिलतीशायरी को नज़र नही...
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साहित्य-शिल्पी
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[10 Feb 2010 02:30 AM]



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