उसके चेहरे पर मेरी उंगलियां
एक शाम जब उसके चेहरे परहोती हैं मेरी उंगलियांसमंदर से उगने वाली रातचाहती है किसी तरह मुझसे छू जाए और शाम बनी रहे घर्षण होने तकएक शाम जब उसके सीने परसिर रखकर सुनना चाहता हूं मैं बदलते समय के मासूम सवालों का संगीतरात मेरी जेब में रखी डायरी मेंदर्ज होने की...
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Pawan Nishant
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[28 Feb 2010 14:57 PM]



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