क्या हुआ जो रात का

Rajput World क्या हुआ जो रात का उदास है अँधेरा |कैसे रुक सकूँगा जबकि पास है सवेरा ||स्वपन नाचते है आँख में घनी है नींद भी ,आ रही है याद भूल खा गई नसीब भी |किन्तु रही मै बना बस चलने का सहारा ||कैसे रुक सकूँगा जब कि पास है सवेरा ||थक गए है पाँव चूर हो गया शरीर है ,और... [पूरी पोस्ट]
writer Ratan Singh Shekhawat

कविता

views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Mar 2010 20:55 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix