अन्तू ते सन्तू दी गड्डी

स्वप्नलोक अब खुशियों का ना रहा, कोई पारावार ।अपने घर जब आ गई, नई एस्टिलो कार ॥नई एस्टिलो कार, लगे यह बड़ी सुहानी ।इसके आने की है अपनी अलग कहानी ॥विवेक सिंह यों कहें, हमें भी खुशी भई है ।अन्तू ते सन्तू दी गड्डी नई - नई है ॥आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है .... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[21 Feb 2010 01:50 AM]

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