होली का त्यौहार निराला

स्वप्नलोक होली का त्यौहार निराला ।जमकर बरसें रंग-गुलाला ॥भूत-प्रेत गलियों में डोलें ।किन्तु आदमी जैसे बोलें ॥पिच-पिचकर चलती पिचकारी ।कर न सके आराम बिचारी ॥कल तक मौसम था जाड़े का ।लौट गया स्वेटर भाड़े का ॥रंगों में सब सराबोर हैं ।लाल रंग पर खूब जोर है ॥पहुँचे भाई... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[01 Mar 2010 04:37 AM]

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