1411 -"मिल जाये तो मिटटी हैं खो जाये तो सोना हैं"शाश्वत सत्य
कितनी सुंदर सुबह थी वह . अजी नहीं ! मौसम बड़ा खुबसूरत नहीं था ,न तो ठंडी हवा चल रही थी, न रिमझिम बारिश हो रही थी.न वासंती फुल खिले थे ,न हल्की- हल्की धुप बादलो से झांककर मुस्कुरा रही थी . बड़ा ही खराब मौसम था ,चिलचिलाती धुप...
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डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
डॉक्टर
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[22 Feb 2010 02:36 AM]



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