हम नहीं मानेंगे, चाहें हम गलत हैं, तो ये जड़ता की हद है..
इंटेलेक्चुअल आतंकवाद के नाम पर जो शाबासी और कमेंटों का दौर चालू है, उसमें ये बातें पूरी करना जरूरी है कि नजरिये के लिहाज से शाहरुख का एक विशेष समुदाय से ताल्लुक रखना शायद ज्यादा भारी पड़ रहा है। ब्लाग जगत में ये जो एक सिलसिला जारी है कि हम नहीं मानेंगे,...
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prabhat gopal
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[19 Feb 2010 14:31 PM]



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