आखिर में
शब्दो से माला-माल कर रहे अजित जी, की आज [१८-०२-१०] की ''शब्दों का सफ़र'' पर प्रेरणा दायक पोस्ट से प्रभावित:- माल बनता है मल ही आखिर में,'आज' बनता है 'कल'* ही आखिर में.धन पशु है; पशु भी धन ही है,चल भी होता अचल ही आखिर मे. महंगी होती...
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Mansoor Ali
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[18 Feb 2010 21:38 PM]



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