जवानी के दिनों की कतरने ...दर्दे दिल की बात को मै इस चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँ

निरन्तर दर्दे दिल की बात को मै इस चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँइस दिल में उठे तूफानों को चिट्ठी में कैसे लिख सकता हूँ.000शिकायत हमें आप से है की आपने हमें अब तक देखा नहीं तेरे पैगाम के इंतज़ार में है दिल मेरा पर तूने पैगाम भेजा नहीं.000दिल से तुम खूब मुस्कुराया... [पूरी पोस्ट]
writer महेन्द्र मिश्र
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[04 Mar 2010 09:35 AM]

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