वासंती दोहे

मनोरमा क्या वसंत का मोल है जब न प्रियतम पास?कोयल की हर कूक में पिया मिलन की आस।।अमराई के संग में पीले सरसों फूल।किसके सर बिन्दी लगे किसके माथे धूल।।रस कानों में घोलती मीठी कोयल-तान।उस मिठास के दर्द से प्रायः सब अन्जान।।पतझड़ ने आकर कहा आये द्वार वसंत।नव-जीवन... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[14 Feb 2010 09:07 AM]

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