दर्द बताना नहीं अच्छा
हर बार अपना दर्द बताना नहीं अच्छाऔर जख्म हैं ऐसे कि छुपाना नहीं अच्छातुमसे मिलूँ तो सौंप दूँ अपना सरापा दिललफ्जों में हरएक बात बताना नहीं अच्छावो चुप रहा तो मैंने भी खामोशी ओढ़ लीमहफिल में गज़ल गाना सुनाना नहीं अच्छाइक दिल की सदा पे फना हो जाता है ये...
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श्यामल सुमन
गज़ल
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[14 Feb 2010 09:03 AM]



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