खून से मँहगा लगता पानी
जब आँखों से रिसता पानीकुछ न कुछ तब कहता पानीप्रियतम दूर अगर हो जाएतब आँखों से बहता पानीपानी पानी होने पर भीकम लोगों में रहता पानीकभी कीमती मोती बनकरटपके बूंद लरजता पानीतीन भाग पानी पर देखो न पीने को मिलता पानीचीर के धरती के सीने कोकितना रोज निकलता...
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श्यामल सुमन
कविता
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[15 Feb 2010 09:30 AM]



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