बकवास

मनोरमा शासन के जो भी प्रकार हैं, लोकतंत्र है खास।जनहित की बातों को लेकिन कहते हैं बकवास।पैर के नीचे की जमीन भी खिसकायी जाती है,ऐसी चालाकी भाषण में बढ़ जाती है प्यास।।जनता का शासन है फिर भी जनता ही लाचार।वीआईपी कारण दहशत का, सुन दिल्ली सरकार।चौखट पर बाजार खड़ा... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[04 Mar 2010 21:48 PM]

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