'ब' ,'क' और विनयना - पद्मा राय

कथा सरित सागर हमेशा की तरह नाक की सीध में चलती चली जा रही थी कि रिसेप्शन पर वीरा दी दिखायी दीं ।पंकज से किसी टॉपिक पर बात कर रहीं थीं । उन्हें वहां देखते ही स्कूल की पत्रिका की याद आ गयी ।एक दिन पहले ही मिली थी ।उसमें वीरा दी का एक आर्टिकल पढने को मिला । कमाल का सेन्स... [पूरी पोस्ट]
writer padma rai
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[07 Mar 2010 07:16 AM]

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