माय नेम इज....और मैं पत्रकार नहीं हूं
लोकतंत्र के चार खम्भों में सिनेमा की कोई जगह है नहीं, लेकिन सिल्वर स्क्रीन की चकाचौंध सब पर भारी पड़ेगी यह किसने सोचा होगा। "माई नेम इज खान" के जरिये सिनेमायी धंधे के मुनाफे में राजनीति को अगर शाहरुख खान ने औजार बना लिया या राजनीति प्रचार तंत्र का सशक्त...
[पूरी पोस्ट]
Punya Prasun Bajpai
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[21 Feb 2010 01:07 AM]



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