इस तरह मेरे औकात का पता चल गया

हृदयांजलि एक मित्र का फोन आया. उसने पूछा, यार कहां हो. मैंने जवाब दिया, घर पर हूं, कहो, क्या बात है. उसने कहा, नानाजी देशमुख के बारे में थोड़ा विस्तार से बता सकते हो. मैंने पूछा, कौन नानाजी देशमुख? उसने कहा, नहीं जानते हो तो जल्दी पता करो, मुझे सिर्फ इतना पता है... [पूरी पोस्ट]
writer Satyajeetprakash
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[07 Mar 2010 02:21 AM]

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