सितारों ने की दर्ज है ये शिकायत...
अब ग़ज़ल की बारी है। विगत कुछ प्रविष्टियों में इधर-उधर की सुनाने के बाद अब एक ग़ज़ल। पुरानी है, मेरे चंद साथियों के लिये जो श्री पंकज सुबीर जी के ब्लौग के नियमित पाठक हैं| पुरानी ग़ज़ल नये लिबास में कि मतले में बदलाव है और चंद अशआर नये जोड़े हैं। जानता हूँ कि...
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गौतम राजरिशी
ग़ज़ल
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[28 Feb 2010 22:35 PM]



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