आप कहते हैं तो...

Firdaus's Diary ज़िन्दगी को ज़िन्दगी समझूंगी मैंआप कहते हैं तो फिर जी लूंगी मैंजब सर तस्लीम खुम कर दियाना नहीं, हां बोलूंगी मैंगर नहीं है आपको जूड़ा पसंदइन घटाओं को खुला रखूंगी मैंआप अगर यूं ही मुझे तकते रहेनाम अपना आइना रख लूंगी मैंलब हिलने की ज़रूरत ही नहीं रहीआपके चहरे... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान

ग़ज़ल

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[06 Mar 2010 07:58 AM]

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