सुलगते अहसास...
ज़िन्दगी के आंगन मेंमुहब्बत की चांदनी बिखरी है...हसरतों की क्यारी मेंसतरंगी ख़्वाबों के फूल खिले हैं...ख्वाहिशों के बिस्तर परसुलगते अहसास की चादर है...इंतज़ार की चौखट परबेचैन निगाहों के पर्दे हैं...माज़ी के जज़ीरे परयादों की पुरवाई है...फिर भीज़िन्दगी के आंगन...
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फ़िरदौस ख़ान
नज़्म
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[07 Mar 2010 21:03 PM]



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