ये कैसे बाबा

ये है इंडिया मेरी जान जिस तरह हाथी के दांत दिखाने के लिए और होते हैं और खाने के लिए और, ठीक उसी तरह होते हैं संत। ये दूसरों को तो उपदेश देते फिरते हैं कि तुम ऐसा करो-वैसा करो, और खुद क्या कुछ नहीं करते। दिखावे के लिए भले ही ये लंबा तिलक लगात हों, लाल-पीले कपड़े पहनते हों पर न... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन मिश्रा
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[04 Mar 2010 16:25 PM]

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