"पल रिसता रहा"

कुछ लम्हे "पल रिसता रहा"प्रेम पराकाष्ठा की परिधि कोजिस पल ने था पार कियावो शरमा के सिमट गया जिस में भराआक्रोश था, तकरार थीवो पल विद्रोह करचला गयाजिस ने सही क्रोध की पीड़ावो अश्रुओं संग क्षितिज में विलीन हुआविरह अग्नि में जो अभिशप्त हुआ और झुलस गया वो अभागा "पल... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[07 Mar 2010 21:51 PM]

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