कुछ गजलें (भाग एक)
(ये ग़ज़लें मैंने वर्ष १९८९ से १९९१ के बीच अपने अकेलेपन से जूझते हुए लिखी थी.इन् गजलों की एक एक पंक्तियाँ मेरी भावनाओं का सच्चा प्रतिबिम्ब हैं...शब्द उन्हें हो सकता है बयां करने में असमर्थ हों ,पर उनसे उनकी परिभाषा पर असर नहीं पड़ता .उम्मीद है आपको पसंद...
[पूरी पोस्ट]
Nihar Khan
5
0
0
0
0
[21 Feb 2010 06:13 AM]



Shuffle







