तुम्हारी ही खातिर
उनको हम अपने दिल में छुपाये बैठे हैं,सारी दुनिया से जैसे उनको चुराए बैठे हैं।खुदा का नूर टपकता है उनके चेहरे से,इसलिए उनको तो हम खुदा बनाये बैठे हैं।उनकी रंगत जैसे सुबह की धूप खिली, हम खुद को उस रंग से नहलाये बैठे हैं।वो आईना है सब कुछ बता देता है...
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Nihar Khan
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[22 Feb 2010 04:40 AM]



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