तुम्हारी ही खातिर

Kuchh kahi kuchh unkahi उनको हम अपने दिल में छुपाये बैठे हैं,सारी दुनिया से जैसे उनको चुराए बैठे हैं।खुदा का नूर टपकता है उनके चेहरे से,इसलिए उनको तो हम खुदा बनाये बैठे हैं।उनकी रंगत जैसे सुबह की धूप खिली, हम खुद को उस रंग से नहलाये बैठे हैं।वो आईना है सब कुछ बता देता है... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Feb 2010 04:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix