सूरज को माथे पर बिंदी सा सजाया कीजिये
ख्वाब में मुझको रोज़ बुलाया कीजिये , चैन से रोज़ खुद को सुलाया कीजिये।एक दफा खुदा से मांग लो मुझको,फिर हर दफा मुझको यूँ ही पाया कीजिये।आपकी जुल्फें घटायें हैं सावन की, अपने चाँद से मुखरे से घटा हटाया कीजिए। सूरज आपकी खतिर उगा है लाल, अपने माथे उसको बिंदी...
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Nihar Khan
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[01 Mar 2010 02:07 AM]



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