कुछ पल तुम बैठो पास मेरे......

Kuchh kahi kuchh unkahi कुछ पल तुम बैठो पास मेरे, और कुछ बातें मुझसे ख़ास करो,मुझको छूकर मुझको पाकर, तुम मुझको फिर से सुवास करो।मैं चातक बन कर वर्षों से बैठा, तक रहा तुम्हारी ओर प्रिये,तुम स्वाति बूँद बन कर बरसो और मेरे दुःख का नाश करो।मेरा जीवन तो है सूना सूना पतझर पतझर और... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[02 Mar 2010 09:51 AM]

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