कुछ अपनी बात कहूँ मैं तुमसे ......

Kuchh kahi kuchh unkahi कुछ अपनी बात कहूँ मैं तुमसे, कुछ तेरी बात सुनु,तेरे होठों पे खिलते गुलाब की कलियों को मैं चुनु।रात सोता सोच के तुमको सुबह उठूँ तेरा नाम लिए,फिर दिन भर तेरी तस्वीरों से मैं बातें ढेर करूँ।तेरी ही यादें दे जाती हैं मेरी सूनी आँखों में आंसू ,अपनी पलकों पे... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[03 Mar 2010 00:56 AM]

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