आँखों में काजल न यूँ आप लगाया कीजिये

Kuchh kahi kuchh unkahi आँखों में काजल न यूँ आप लगाया कीजिये, यूँ रात की तीरगी ऐसे न बढ़ाया कीजिये।आपके छूते ही पत्थर भी हो जाता है आदमी ,मेरे दुश्मनों की फौज यूँ न बढाया कीजिये।जिंदगी की राह में सिर्फ कांटे ही कांटे हैं बिछे,पांव नाज़ुक हैं आपके, उन्हें न उतारा कीजिये।मैं नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[07 Mar 2010 08:30 AM]

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