चुप चुप से हो गुमसुम से हो

Kuchh kahi kuchh unkahi चुप चुप से हो गुमसुम से हो,मुझसे बातें क्यूँ नहीं करते हो,इतना दो बता दो मुझको क्या तुम आज भी मुझपर मरते हो।गर्म हवा सी चलती है और मौसम पतझड़पतझड़ सा होता है,गुस्से में जब तुम होते हो और फिर लम्बी लम्बी साँसे भरते हो।प्यार से जब बातें करते हो तो मन में... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[07 Mar 2010 08:24 AM]

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