दिल की तमन्ना........
मन ख्वाब का पिटाराउङता है डोलता है,मिलती हैं,जबभी पलकें,गुप-चुप सा, बोलता है।मैं ख्वाब का समन्दर,तुम खुल के सांस लेना,बुनना उस खुशी को,जिसकी भी हो तमन्ना।उस मीठी-सी हंसी में,सुकूं है, कई पलों का,चलो आज खुल के हंस ले दिल की है ये तमन्ना।........... प्रीती...
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PREETI BARTHWAL
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[12 Feb 2010 02:27 AM]



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