सोचता था

उधेड़-बुन सोचता थातुम मिलोगीतो ऐसा होगातुम मिलोगीतो वैसा होगाघंटों हम बातें करेंगेएक-दूसरे को निहारा करेंगेचुप न रहेंगेखूब हँसेंगेंएक-दूसरे की टांग खींचेंगेंलेकिन तुमआई-फोन में घुसी रहीऔर मैंब्लैकबेरी से चिपका रहादिन ढलाऔर रात हुईदिल से दिल कीन बात हुईतुम चलीऔर... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

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[21 Feb 2010 18:47 PM]

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