जब तुम आई थी
जब तुम आई थीतब कुछ कोपलें उग आई थीऔर वसंत का आगमन हुआ थाअब वो फूल बन गई हैंऔर शूल सी चुभती हैतुम मेरे कितने पास थीऔर मैं तुमसे कितना दूर!***कहा था किफिर मिलेंगे हमलेकिनजैसे मिले थे कलक्या फिर मिलेंगे हम?***झूठ है कि जीवन क्षणभंगुर है!तुम चंद पलों के लिए...
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Rahul Upadhyaya
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[08 Mar 2010 01:54 AM]



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