या हुसैन वा हुसैन...तस्लीम [A] कर या न कर
नींद ....अचानक कभी नहीं ...आई लेकिन इधर ऐसा ही हो रहा है...और जानते हैं..उसका समय कब होता है जब मैं खर्राटें लेने लगता हूँ..ठीक उसी वक़्त मुआज्ज़िन अज़ान पुकार रहा होता है या दूर मंदिर से शंख की आवाज़ आ रही होती है ...जी आप सही समझ रहे हैं..रूह...
[पूरी पोस्ट]
शहरोज़
हाल-बेहाल
4
0
0
0
0
[06 Mar 2010 04:28 AM]



Shuffle








