चुगलख़ोर सुर्ख गुलाब

Chashmebaddoor चुगलख़ोर सुर्ख गुलाबखोल गया मेरे सीने में दफ़्न राज़यूं तो आंखों से छलकता थातुमने देखा नहींहोंठों पर थिरकता थातुमने सुना नहींरोम रोम में उछलता थातुमने छुआ नहींऔर चुगलख़ोर गुलाब नेसब कह दिया!... [पूरी पोस्ट]
writer अपराजिता
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[17 Feb 2010 09:01 AM]

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