हम और तुम !
लगभग २० वर्ष पहले लिखी एक रचना ज्यों की त्यों प्रस्तुत कर रहा हूँ , पत्नी को मनाने की असफल कोशिश करता एक बेचारे पति का यह चित्रण बहुत स्थानों पर आज भी वास्तविकता है ....तुम मेरे दिल की रानी हो मैं तेरे दिल का कचरा हूँ ,पति ढूँढा...
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सतीश सक्सेना
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[24 Feb 2010 02:21 AM]



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