राँझा -राँझा कहन्दी नि मैं आपे रांझा होई

अमृता प्रीतम की याद में..... जवानी आई रे मेरे बचपन के इस गांव में बातें उडती है इन बहती हुई हवाओं में वह ऊँचे ऊँचे पहाड़ों में घिरी हुई वादी थी ,जहाँ सूरज तेजी से उतर जाता है .लेकिन वहां अभी उसके सुर्ख रंग ने नदी के पानी में एक तिलस्म बिछाया हुआ था | देखा वादी के गांव की एक मासूम सी... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[17 Feb 2010 02:11 AM]

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