..........तब मेरी खुशी का ठिकाना न रहा

meraashiyana मैं शाम के समय अपने घर के नीचे टहल रही थी कि तभी मेरी पडो़सन सहेली अपने बेटे के सथ बाजार से शॉपिंग करके लौट रही थी । मुझे देखकर मेरी सहेली रुक गई और हमारे बीच इधर - उधर की गपशप होने लगी । तभी मेरी नजर उसके बेटे के हाथ में लगी थैली पर गई । मैंने पूछ लिया... [पूरी पोस्ट]
writer shashisinghal
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[27 Feb 2010 02:24 AM]

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