चालीस साल बाद बडे परदे पर आराधना देखते हुए लोग अपने मोबाईल कैमरे से इन लम्हों को क्या कैद करते……लम्हों ने इन लोगों को खुद ब खुद कैद कर लिया....सतीश

सफ़ेद घर      हाल ही में 1969 की फिल्म आराधना देखने मुंबई के रीगल सिनेमा हॉल में गया था। नॉस्टॉल्जिया पूरे शबाब पर था।आखिर चालीस साल बाद फिर वही फिल्म बडे पर्दे पर जो थी। रेडियो मिर्ची ने यह शो आयोजित किया था पुरानी जीन्स कार्यक्रम के तहत। आर... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश पंचम

फिल्म

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[20 Feb 2010 21:43 PM]

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