1411: गुलजार के लिखे 'दिल तो बच्चा है' वाला गीत सुन कर जब एक बाघ को बीडी जलाने की इच्छा होने लगे तो........सतीश पंचम
और भई बाघ, इस खडखडीया दोपहरी में कहां मारे मारे फिर रहे हो ? गुलजार जी को ही ढूँढ रहा हूँ। क्यों, तुम गुलजार को क्यों ढूँढ रहे हो भई।उन्हें ढूँढ रहा हूँ क्योंकि वही हैं जो कि हमारे बाघों के मन की बात पढ लेते हैं और न सिर्फ पढ लेते हैं बल्कि...
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सतीश पंचम
व्यंग्य
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[27 Feb 2010 09:15 AM]



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