स्त्री का सच

नारी का कविता ब्लॉग स्त्री सुहाती हैंकबजबनयनो कोझुका करओठ को दबा करइठलाती हैंरति बन जाती हैंयाआँखों मे आंसूंझुकी हुई गर्दनसहनशीलता कि प्रतिमाबन जीती जाती हैंजिन्दगी शांति से चलती रहेचाहे स्त्री उसमे कितनी भीतपती रहेसच बोलने सेहर स्त्री कोमना किया जाता हैंऔर... [पूरी पोस्ट]
writer रचना
views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 08:08 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix