अनैतिकता बोली नैतिकता से

नारी का कविता ब्लॉग अनैतिकता बोली नैतिकता सेमंडियों , बाजारों और कोठोपर मेरे शरीर को बेच करकमाई तुम खाते थेअब मै खुद अपने शरीर कोबेचती हूँ , अपनी चीज़ कीकमाई खुद खाती हूँतो रोष तुम दिखाते होमनोविज्ञान और नैतिकताका पाठ मुझे पढाते होक्या अपनी कमाई केसाधन घट जाने सेघबराते हों... [पूरी पोस्ट]
writer रचना
views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[05 Mar 2010 00:33 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix