हे नर क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम
क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुमकि नारी को हथियार बना करअपने आपसी द्वेषो को निपटाते होक्यों आज भी इतने निर्बल हो तुमकि नारी शरीर किसंरचना को बखाने बिनासाहित्यकार नहीं समझे जाते होतुम लिखो तो जागरूक हो तुमवह लिखे तो बेशर्म औरत कहते होतुम सड़को को सार्वजनिक...
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[06 Mar 2010 02:08 AM]



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